Centre Prepares Three-Year Anti-Narcotics Action Plan — Internal Security | UPSC Current Affairs 3 June 2026

📅 3 June 2026 | आंतरिक सुरक्षा | GS-3 | UPSC Prelims + Mains 🌐 ड्रग माफिया पर कड़ा प्रहार! — गृह मंत्रालय और NCB ने तैयार किया 3 साल का मेगा एक्शन प्लान; 2047 तक 'नशामुक्त भारत' का लक्ष्य!

📋 परिचय (Introduction)

भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और केंद्रीय मादक पदार्थ विरोधी एजेंसियों ने घरेलू ड्रग कार्टेल और विदेशों में छिपे अपराधियों (Overseas Fugitives) से निपटने के लिए एक व्यापक तीन-वर्षीय कार्य योजना (Three-Year Action Plan) तैयार की है। यह योजना वर्ष 2047 तक 'नशामुक्त भारत' (Drug-Free India) के राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ी हुई है। इसके तहत नए प्रवर्तन वर्टिकल (Enforcement Verticals), खुफिया समन्वय (Intelligence Coordination) और वित्तीय ट्रैकिंग उपायों को शामिल किया गया है। UPSC GS-3 (Internal Security & Challenges) के दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा का टॉपिक है।

🔑 मुख्य बिंदु (Key Points)

  • रणनीतिक लक्ष्य — वर्ष 2047 तक भारत को पूरी तरह नशामुक्त बनाना। इस योजना का ब्लूप्रिंट मई 2026 में गृह मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

  • इंटेलिजेंस विंग का गठन — योजना के तहत साल 2026 के अंत तक सभी राज्यों के इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत अलग से एंटी-नारकोटिक्स विंग स्थापित किए जाएंगे।

  • टॉप ड्रग लॉर्ड्स पर नज़र — प्रत्येक राज्य में शीर्ष 15 बड़े ड्रग माफियाओं (Top 15 Drug Lords) का एक व्यापक डोजियर (Dossier) तैयार किया जा रहा है।

  • ऑपरेशन वाइप (Operation WIPE) — ऑनलाइन ड्रग तस्करी और फार्मास्युटिकल दवाओं के अवैध दुरुपयोग को रोकने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 26 अप्रैल 2026 को 'ऑपरेशन वाइप' की शुरुआत की थी।

📚 Static GK — Exam के लिए ज़रूरी तथ्य

  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) — इसकी स्थापना 1986 में केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत की गई थी। यह मादक पदार्थों के कानून प्रवर्तन के लिए भारत की नोडल एजेंसी है।

  • NDPS अधिनियम, 1985 — 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985' भारत में नशीली दवाओं और मनोोत्तेजक पदार्थों के नियंत्रण और विनियमन से संबंधित मुख्य कानून है।

  • संस्थागत विस्तार — अगस्त 2024 में सरकार ने NCB की स्वीकृत ताकत बढ़ाकर 1,496 कर दी थी (425 नए पद)। इसके क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) को 3 से बढ़ाकर 7 और जोनल कार्यालयों को 13 से बढ़ाकर 30 किया गया है।

  • NAPDDR योजना — 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन' (NAPDDR) को साल 2020 से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) द्वारा लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुनर्वास और जागरूकता फैलाना है।

🌍 गहरी समझ — तकनीक और वित्तीय जांच उपकरणों का उपयोग

ड्रग कार्टेल्स अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर हाई-टेक हो चुके हैं, जिससे निपटने के लिए इस नए प्लान में आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है:

  1. वित्तीय नेटवर्क पर वार: ड्रग सिंडिकेट्स की रीढ़ को तोड़ने के लिए हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और संदिग्ध संपत्तियों (Suspicious Assets) की निगरानी की जा रही है।

  2. आधुनिक तकनीक: डार्कनेट विश्लेषण (Darknet Analysis), मशीन लर्निंग (ML), और NATGRID (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) का उपयोग करके खुफिया जानकारियों को आपस में साझा किया जा रहा है।

  3. मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC): इसके तहत एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है जो एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों और डार्कनेट प्लेटफॉर्म पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करती है।

✍️ Mains के लिए विश्लेषण (GS-3)

  • Border & Maritime Vulnerability (सीमा और समुद्री सुरक्षा): भारत 'गोल्डन क्रेसेंट' (पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान) और 'गोल्डन ट्रायंगल' (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) जैसे दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक क्षेत्रों के बीच स्थित है। इस खतरे से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF), असम राइफल्स, SSB, भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड मिलकर संयुक्त अभियान चला रहे हैं।

  • The Nexus of Drug Trafficking and Terrorism (नार्को-आतंकवाद): ड्रग्स से होने वाली अवैध कमाई का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों और आंतरिक अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। इसलिए, डार्कनेट और वित्तीय नेटवर्क को ट्रैक करना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

  • Two-Way Approach (दोहरा दृष्टिकोण): सरकार जहाँ एक तरफ गृह मंत्रालय के तहत 'आपूर्ति में कमी' (Supply Reduction - सीमा पर जब्ती और गिरफ़्तारी) कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक न्याय मंत्रालय के NAPDDR के माध्यम से 'मांग में कमी' (Demand Reduction - पुनर्वास और इलाज) पर काम कर रही है।

❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • Q: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है?

    • A: केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs)।

  • Q: हाल ही में समाचारों में रहा 'Operation WIPE' किससे संबंधित है?

    • A: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और फार्मास्युटिकल दवाओं के माध्यम से होने वाली अवैध ड्रग तस्करी को रोकने के लिए NCB का एक विशेष अभियान।

  • Q: 'National Action Plan for Drug Demand Reduction' (NAPDDR) किस मंत्रालय की पहल है?

    • A: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment)।

  • Q: भारत का मुख्य ड्रग-विरोधी कानून कौन सा है और यह कब बना था?

    • A: NDPS एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act), जिसे 1985 में अधिनियमित किया गया था।

🧠 Practice Quiz — UPSC Style (5 MCQ)

Q1. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसकी स्थापना वर्ष 1986 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत की गई थी।

  2. यह भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने वाली एकमात्र नोडल केंद्रीय एजेंसी है। सही कथन चुनिए: A) केवल 1 B) केवल 2 C) 1 और 2 दोनों ✅ D) कोई नहीं

Q2. ऑनलाइन ड्रग तस्करी और फार्मास्युटिकल दवाओं के अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए NCB द्वारा शुरू किए गए अभियान का नाम क्या है? A) ऑपरेशन कवच B) ऑपरेशन वाइप (Operation WIPE) ✅ C) ऑपरेशन गरुड़ D) ऑपरेशन सतर्क

Q3. भारत में नशीले पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए 'मांग में कमी' (Demand Reduction) और पुनर्वास के लिए लागू की गई 'NAPDDR' योजना किस मंत्रालय के अधीन है? A) गृह मंत्रालय B) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय C) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ✅ D) युवा मामले और खेल मंत्रालय

Q4. 'मादक पदार्थ और साइकोट्रोपिक पदार्थ अधिनियम' (NDPS Act) भारत में किस वर्ष लागू किया गया था? A) 1950 B) 1972 C) 1985 ✅ D) 2001

Q5. आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में, भारत किन दो वैश्विक अवैध अफीम उत्पादक क्षेत्रों (Drug Corridors) के बीच स्थित है? A) गोल्डन क्रेसेंट और गोल्डन ट्रायंगल ✅ B) सिल्क रूट और स्पाइस रूट C) गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और रेड कॉरिडोर D) इनमें से कोई नहीं

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

गृह मंत्रालय का यह तीन-वर्षीय एक्शन प्लान केवल ड्रग्स पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ड्रग सिंडिकेट्स के वित्तीय साम्राज्य (Financial Infrastructure) को नष्ट करने की एक सोची-समझी रणनीति है। डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी जैसे आधुनिक खतरों से निपटने के लिए मशीन लर्निंग और मल्टी-एजेंसी सहयोग का यह मॉडल भविष्य में भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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