KSTAR का नया कीर्तिमान: दक्षिण कोरिया ने 102 सेकंड तक प्लाज्मा को नियंत्रित किया — Science & Tech | UPSC Current Affairs 3 June 2026


📅 3 June 2026 | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS-3 | UPSC Prelims + Mains 🌐 स्वच्छ ऊर्जा की ओर बड़ा कदम! — दक्षिण कोरिया के 'कृत्रिम सूर्य' (KSTAR) ने फ्यूजन रिसर्च में तोड़े पुराने रिकॉर्ड।

📋 परिचय (Introduction)

दक्षिण कोरिया के KSTAR (Korea Superconducting Tokamak Advanced Research) डिवाइस ने परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, KSTAR ने 'हाई-कन्फिनमेंट मोड' (H-mode) में प्लाज्मा को 102 सेकंड तक स्थिर बनाए रखा। इसके साथ ही, इसने 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस के आयन तापमान पर प्लाज्मा को 48 सेकंड तक नियंत्रित करने का नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया है। यह उपलब्धि भविष्य की 'असीमित स्वच्छ ऊर्जा' की संभावनाओं को और प्रबल बनाती है।

🔑 मुख्य बिंदु (Key Points)

  • KSTAR क्या है? — यह दक्षिण कोरिया के डेजॉन (Daejeon) में स्थित एक 'सुपरकंडक्टिंग टोकामक' (Superconducting Tokamak) है, जिसे 'कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूजन एनर्जी' द्वारा संचालित किया जाता है।

  • प्रमुख उपलब्धियां —

    • 102 सेकंड तक हाई-कन्फिनमेंट मोड (H-mode) में प्लाज्मा को बनाए रखना।

    • 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस के तापमान को 48 सेकंड तक स्थिर रखना (2021 में यह रिकॉर्ड 30 सेकंड था)।

  • अपग्रेड (Tungsten Divertor) — 2023 में KSTAR में टंगस्टन (Tungsten) से बने 'डाइवर्टर' लगाए गए थे। टंगस्टन का गलनांक (melting point) 3,422°C होता है, जो इसे अत्यधिक गर्मी को सहने में सक्षम बनाता है।

📚 Static GK — Exam के लिए ज़रूरी तथ्य

  • टोकामक (Tokamak) — यह एक 'मैग्नेटिक कन्फिनमेंट डिवाइस' (चुंबकीय परिरोध उपकरण) है, जो प्लाज्मा को एक डोनट के आकार के (toroidal) कक्ष में फंसाकर रखता है।

  • H-mode (High-Confinement Mode) — यह 1982 में खोजी गई एक प्लाज्मा अवस्था है। यह फ्यूजन प्रयोगों में गर्मी और कणों के बेहतर नियंत्रण (confinement) में मदद करती है।

  • परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) — यह वही प्रक्रिया है जो सूर्य और तारों में ऊर्जा उत्पन्न करती है। इसमें दो हल्के नाभिक (आमतौर पर हाइड्रोजन के समस्थानिक - Deuterium-Tritium) जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।

🌍 गहरी समझ — डाइवर्टर का महत्व

फ्यूजन रिएक्टर में 'डाइवर्टर' एक महत्वपूर्ण घटक है। यह प्लाज्मा के किनारे से अशुद्धियों, गर्मी और निकास कणों (exhaust particles) को बाहर निकालने का काम करता है। KSTAR में पुराने कार्बन-आधारित डाइवर्टर को टंगस्टन से बदलने के बाद, अत्यधिक गर्मी के बावजूद इसके सतह के तापमान में केवल 25% की वृद्धि देखी गई, जो कि एक सफल इंजीनियरिंग मॉडल है।

✍️ Mains के लिए विश्लेषण (GS-3: Energy & Technology)

  • भविष्य की ऊर्जा: परमाणु संलयन को 'पवित्र ग्रिल' (Holy Grail) कहा जाता है क्योंकि यह शून्य कार्बन उत्सर्जन (Zero Carbon Emission) और रेडियोधर्मी कचरे (Radioactive waste) के बिना असीमित ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

  • चुनौतियां: KSTAR का लक्ष्य 300 सेकंड तक प्लाज्मा को स्थिर रखना है। प्लाज्मा इतना गर्म होता है कि यह किसी भी ज्ञात धातु को पिघला सकता है, इसलिए इसे चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic Fields) में लटका कर रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • Q: KSTAR का पूर्ण रूप क्या है?

    • A: Korea Superconducting Tokamak Advanced Research.

  • Q: फ्यूजन रिसर्च में 'टंगस्टन' का उपयोग क्यों किया जाता है?

    • A: क्योंकि टंगस्टन का गलनांक बहुत अधिक (3,422°C) होता है, जिससे यह उच्च ताप को सहन कर सकता है।

  • Q: KSTAR किस देश में स्थित है?

    • A: दक्षिण कोरिया (डेजॉन)।

🧠 Practice Quiz — UPSC Style (3 MCQ)

Q1. KSTAR डिवाइस का प्राथमिक उद्देश्य क्या है? A) परमाणु विखंडन (Fission) के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन B) परमाणु संलयन (Fusion) का अध्ययन और प्लाज्मा नियंत्रण ✅ C) उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए प्रपल्शन सिस्टम D) जलवायु परिवर्तन का डेटा संग्रह

Q2. परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) के लिए 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता क्यों होती है? A) परमाणुओं के बीच प्रतिकर्षण बल को पार करने के लिए ✅ B) हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने के लिए कम तापमान की जरूरत होती है C) रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए D) इनमें से कोई नहीं

Q3. 'टोकामक' (Tokamak) उपकरण में 'डाइवर्टर' का क्या कार्य है? A) प्लाज्मा के तापमान को बढ़ाना B) गर्मी, अशुद्धियों और निकास कणों को हटाना ✅ C) केवल बिजली का उत्पादन करना D) चुंबकीय क्षेत्र को नियंत्रित करना

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

KSTAR द्वारा 102 सेकंड तक प्लाज्मा को नियंत्रित करना वैश्विक ऊर्जा संकट के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत भी 'इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर' (ITER) परियोजना का हिस्सा है, इसलिए UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से फ्यूजन तकनीक और KSTAR की प्रोग्रेस लगातार महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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